महासमुंद: ऑनलाइन वेतन बिल में हेरफेर का खुलासा, प्राचार्य समेत 3 निलंबित; जानिए कैसे हुई गड़बड़ी

ऑनलाइन वेतन बिल में हेरफेर का खुलासा, प्राचार्य समेत 3 निलंबित; ऐसे हुआ सरकारी राशि का खेल

ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय गबन की जांच को दर्शाता लchained लैपटॉप और ताला
महासमुंद में ऑनलाइन वेतन बिल हेरफेर मामले की जांच जारी के बीच प्रतिकात्मक तस्वीर।
छत्तीसगढ़,महासमुंद

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शिक्षा विभाग से जुड़ा ऑनलाइन वेतन भुगतान का एक गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर में वेतन बिल तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितता पाए जाने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर समेत तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबित कर्मचारियों में सहायक ग्रेड-2 नारायण प्रसाद निर्मलकर और सहायक ग्रेड-2 अकील मोहम्मद खान भी शामिल हैं बताया जा रहा है की यह मामले को गंभीरता से देखते हुवे लोक शिक्षण संचालनालय ने तुरंत कार्यवाही कर इन्हे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।

 जुलाई 2024 के वेतन बिल से शुरू हुई गड़बड़ी :–

प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय आदेश के अनुसार, सहायक ग्रेड-2 नारायण प्रसाद निर्मलकर पर जुलाई 2024 के वेतन देयक में वास्तविक वेतन और भत्तों की राशि में अत्यधिक वृद्धि करने का आरोप है। बढ़ी हुई राशि के आधार पर वेतन बिल तैयार किया गया और उसके जरिए कोषालय से भुगतान कराया गया जो धीरे धीरे पकड़ में आने लगा । 

ऑनलाइन राशि बढ़ाकर तैयार की गई :–

मामला यहीं नहीं रुका। विभाग के मुताबिक मई 2025 से जनवरी 2026 तक के नियमित वेतन देयकों में भी मूल वेतन और विभिन्न भत्तों की राशि ऑनलाइन बढ़ाकर बिल तैयार किए गए। इसके बाद ई-बिल प्रणाली के माध्यम से भुगतान कराया गया। यानी एक बार की गड़बड़ी के बजाय कई महीनों तक वेतन भुगतान प्रक्रिया में राशि बढ़ाने का आरोप सामने आया है यानी हरबार भुगतान की राशि बढ़ाकर तैयार किया जाने लगा ।

ऑनलाइन ई-बिल सिस्टम में कैसे हुई हेरफेर? :–

वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद कथित तौर पर बिल में दर्ज मूल वेतन और भत्तों की राशि में बदलाव किया गया। सामान्य तौर पर कर्मचारी का वेतन और अनुमन्य भत्ते निर्धारित रिकॉर्ड के आधार पर बिल में दर्ज किए जाते हैं। लेकिन इस मामले में वास्तविक राशि से अधिक रकम दर्शाकर ई-बिल तैयार करने और भुगतान कराने की बात विभागीय आदेश में सामने आई है जिसमे यह धीरे धीरे फ्रॉड की श्रेणी में आने लगा ।

यही वजह है कि विभाग ने इसे महज सामान्य वेतन संबंधी गलती न मानते हुए फ्रॉड, शासकीय नियमों की उपेक्षा और शासकीय धन को नुकसान पहुंचाने से जुड़ा गंभीर मामला माना है जिसके बाद तुरंत कार्यवाही करते हुवे इन्हे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।

प्राचार्य समेत तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई :–

मामले में प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर, सहायक ग्रेड-2 नारायण प्रसाद निर्मलकर और सहायक ग्रेड-2 अकील मोहम्मद खान को निलंबित किया गया है। विभागीय कार्रवाई में नारायण प्रसाद निर्मलकर पर वेतन बिल में राशि बढ़ाने की मुख्य भूमिका से जुड़े आरोप हैं, जबकि प्रभारी प्राचार्य और दूसरे सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी पर मामले में लापरवाही या संलिप्तता से संबंधित कार्रवाई करते हुवे प्रकरण दर्ज किया गया ।

तीनों को मिलेगा नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता :–

इस मामले में तीनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में कर्मचारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का प्रावधान रहेगा जो उन्हें जीवन निर्वाह के अनुसार दिया जाएगा ।

 अब आगे क्या होगी जांच ? :–

इस मामले के सामने आने के बाद वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और ऑनलाइन बिलों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि कितनी राशि में अनियमितता हुई, किस स्तर पर बिलों को मंजूरी मिली और भुगतान प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी कार्यालयों में वेतन भुगतान जैसी वित्तीय प्रक्रिया ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से संचालित होती है। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से बिल तैयार होने से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जा सकता है जिससे इस मामले में हुए पूरे तरीके से हुवे घपलेबाजी पूरी तरह से पकड़ में और समझ में आ सके ।

वित्तीय  अनियमितता की वास्तविक राशि की जांच और कोई कर्मचारी का संलिप्तता की जांच बाकी :–

महासमुंद के सिरपुर स्कूल से सामने आया यह मामला ऑनलाइन वित्तीय व्यवस्था में निगरानी और सत्यापन की अहमियत को सामने लाता है। विभाग ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर कार्रवाई शुरू कर दी है। अब जांच में कथित वित्तीय अनियमितता की वास्तविक राशि और पूरे मामले में अन्य किसी कर्मचारी की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है जिससे यह मामले को पूर्ण रूप से समझकर आगे की कार्यवाही किया जा सके।

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