महासमुंद जेल में कैदी की संदिग्ध मौत, 35 चोटों ने खड़े किए गंभीर सवाल!

 महासमुंद जेल कांड पर हाईकोर्ट सख्त, कैदी की मौत और 35 चोटों पर मांगा जवाब !

महासमुंद जिला जेल में कैदी की मौत से जुड़ी खबर के लिए जेल की प्रतीकात्मक तस्वीर
महासमुंद जिला जेल में कैदी की संदिग्ध मौत के मामले को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर।

छत्तीसगढ़,बिलासपुर,महासमुंद

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला जेल में हत्या के आरोप में बंद एक कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर 35 चोटों के निशान मिलने की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) से जवाब तलब किया है कोर्ट का कहना है की ऐसे मामलो में सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य की है ।

कोर्ट ने कैदी की मौत पर उठाए जरूरी सवाल :–

इस मामले की सुनवाई में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कैदी की मौत की परिस्थितियों को लेकर कई अहम सवाल उठाए। अदालत ने जानना चाहा कि जेल में बंद नीरज भोई की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शरीर पर इतनी चोटें किस तरह आईं जेल में बंद कैदी का ये मामला गंभीर है ।

कैदी के 35 चोटों के निशान ने बढ़ाए सवाल :–

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए चोटों के निशान हैं। मृतक के शरीर पर कुल 35 चोटें बताए जाने के बाद जेल में कैदियों की सुरक्षा और हिरासत के दौरान होने वाली घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं जिसमे हाईकोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगी है ।

जजों ने 31 अगस्त तक मांगे जवाब  :–

हाईकोर्ट ने इसी पहलू को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने मुख्य सचिव और डीजीपी को 31 अगस्त तक व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अधिकारियों के जवाब के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है अब देखना है की 31 अगस्त तक अधिकारयों का जवाब संतोषप्रद होता है या नहीं।

जेल में बंद व्यक्ति की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी HC :–

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हिरासत में हिंसा और मौत को गंभीर विषय माना। अदालत की टिप्पणी का मूल सवाल यही है कि जब कोई व्यक्ति जेल प्रशासन की निगरानी में रहता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी राज्य की होती है जिसमे जेल प्रशासन से जुड़े सुरक्षाओ का ध्यान होना चाहिए ।

मृतक के परिवार को दिया जा चुका है 7.50 लाख का मुआवजा :–

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मृतक के परिवार को 7.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। हालांकि, मुआवजा दिए जाने के बावजूद मौत की परिस्थितियों और शरीर पर मिले चोटों के संबंध में उठे सवाल अपनी जगह बने हुए हैं अब देखना यह है की इन सभी सवालों का जवाब 31 अगस्त की सुनवाई को खुलता है या नही ।

31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई, क्या खुलेंगे 35 चोटों के निशान का राज !:–

हाईकोर्ट द्वारा इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। उस दिन मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से दाखिल किए जाने वाले व्यक्तिगत शपथपत्र पर अदालत में सुनवाई हो सकती है। कोर्ट के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि नीरज भोई की मौत किस परिस्थिति में हुई और पोस्टमार्टम में दर्ज चोटों को लेकर प्रशासन की क्या रिपोर्ट है जिसके ऊपर आगे की सुनवाई का फैसला लिया जाएगा ।

इस मामले ने एक बार फिर सुरक्षा पर उठाए सवाल :–

महासमुंद जिला जेल से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच के सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा अब देखना यह होगा की 31 अगस्त को क्या फैसला आता है ।

निष्कर्ष :–

महासमुंद जिला जेल में 35 चोटों के निशान वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट की सख्ती ने मामले को गंभीर बना दिया है। अब 31 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी की फैसला किसके पक्ष में आता है अगर ये हुआ तो आखिर क्यों हुआ ! 

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