महासमुंद में आज निकलेगी मां महामाया की चुनरी शोभायात्रा, 51 मीटर की चुनरी होगी अर्पित
छत्तीसगढ़ के महासमुंद शहर में आज धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विशेष आयोजन होने जा रहा है। गरबा नाइट समिति की ओर से आयोजित माता की चुनरी शोभायात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर मां महामाया मंदिर पहुंचेगी, जहां माता को 51 मीटर लंबी चुनरी अर्पित की जाएगी। आयोजन के माध्यम से क्षेत्र में शांति, प्रेम, सद्भाव और प्रगति की कामना की जाएगी माता की यह चुनरी हर साल गरबा नाइट के आयोजन समिति के द्वारा गरबा मैदान से मां महामाया मंदिर के लिए निकाली जाती है।
शाम 6 बजे मिनी स्टेडियम से शुरू होगी यात्रा :–
गरबा नाइट समिति के कार्यक्रम के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को शाम 6 बजे महासमुंद के मिनी स्टेडियम से शोभायात्रा प्रारंभ होगी। इसके बाद यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए नगर की कुलदेवी मां महामाया के मंदिर पहुंचेगी जहां माता को ये चुनरी अर्पित किए जायेंगे ।
इस आयोजन को लेकर समिति के सदस्यों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। समिति की अध्यक्ष राशि त्रिभुवन महिलांग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम की व्यवस्था की गई है। आयोजकों की योजना है कि धार्मिक परंपरा को पूरे सम्मान के साथ निभाते हुए माता के चरणों में चुनरी समर्पित की जाए जो शहर में सुख ,समृद्धि शांति लाएगी।
51 मीटर की चुनरी है आयोजन का मुख्य आकर्षण :–
इस शोभायात्रा का प्रमुख आकर्षण मां महामाया को अर्पित की जाने वाली 51 मीटर लंबी विशाल चुनरी होगी। समिति के सदस्य नीरज परोहा के अनुसार, गरबा नाइट समिति की शुरुआत से ही शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन माता को चुनरी अर्पित करने की परंपरा चली आ रही जो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नगर में सुख समृद्धि शांति का प्रतीक माना जाता है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है। धार्मिक मान्यताओं में चुनरी को माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि इस तरह के आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं जो महासमुंद शहर में प्रति वर्ष इस आयोजन समिति की तरफ से किया जाता है ।
नगर की सुख-समृद्धि और सद्भाव के लिए होगी प्रार्थना :–
मां महामाया मंदिर में चुनरी अर्पित करने के पीछे केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की खुशहाली की कामना भी जुड़ी हुई है। समिति और नगरवासियों की ओर से शांति, आपसी भाईचारे तथा निरंतर विकास की प्रार्थना की जाएगी जिसके लिए माता को हर वर्ष शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन चुनरी चढ़ाई जाती है।
महासमुंद जैसे शहरों में धार्मिक आयोजन स्थानीय संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी से पारंपरिक मान्यताओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है जिससे यह आयोजन और भी मनमोहक हो जाता है।
समिति ने प्रशासन से सहयोग की जताई उम्मीद :–
गरबा नाइट समिति के संरक्षक त्रिभुवन महिलांग ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सदस्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। वहीं, समिति की अध्यक्ष और अन्य सदस्यों ने पूर्व की तरह प्रशासन से सहयोग मिलने की उम्मीद जताई है जिससे यह शोभायात्रा सफल हो सके ।
शोभायात्रा के दौरान शहर के प्रमुख मार्गों पर लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए नागरिकों को अनुशासन बनाए रखना चाहिए। यातायात संबंधी किसी आधिकारिक निर्देश की जानकारी मिलने पर उसका पालन करना भी जरूरी होगा जिससे समय अनुसार सभी सही व्यवस्था से पूर्ण होगा ।
धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा के मान्यता से निकलेगी आज माता की चुनरी की शोभायात्रा :–
महासमुंद में 15 अक्टूबर 2026 को निकलने वाली मां महामाया की चुनरी शोभायात्रा धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन है। शाम 6 बजे मिनी स्टेडियम से शुरू होने वाली यात्रा में 51 मीटर की चुनरी मां महामाया को अर्पित की जाएगी। समिति को उम्मीद है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न होगा और नगर में सद्भाव, खुशहाली तथा उन्नति का संदेश देगा जो पूरे नगर के लिए एक महत्वपूर्ण पल रहेगा ।

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