25 लाख खर्च फिर भी नहीं थमा चूहों का आतंक, रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में अब दीमक पर भी होगी कार्रवाई
![]() |
| रायपुर के आंबेडकर अस्पताल के वार्ड की सांकेतिक तस्वीर। Photo: Szabolcs Antal / Unsplash |
छत्तीसगढ़,रायपुर।
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में लंबे समय से चली आ रही चूहों की समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। अस्पताल में चूहों से निपटने के लिए पिछले करीब 12 वर्षों में 25 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद वार्डों, आईसीयू, मुख्य दवा स्टोर और रसोईघर जैसे संवेदनशील हिस्सों में चूहों की मौजूदगी की शिकायतें मिलती रही हैं जिसके बाद भी अभी तक इन चूहों का सफाया पूर्ण रूप से नहीं हो सका ।
अस्पताल प्रबंधन के सामने चुनौती सिर्फ चूहों को नियंत्रित करने की नहीं है। इनके कारण महंगी मेडिकल मशीनों, उपकरणों, दवाइयों और खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है। यही वजह है कि अलग-अलग विभागों से लगातार शिकायतें आने के बाद अब अस्पताल प्रशासन पेस्ट कंट्रोल के लिए नए सिरे से टेंडर की तैयारी कर रहा है जिसमे इन चूहों का सफाया किया जा सके ।
12 साल में लाखों खर्च, फिर भी स्थायी समाधान नहीं :–
जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी सरकारी हॉस्पिटल (मेकाहारा) में 12 वर्ष पहले अस्पताल में चूहों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए लगभग 15 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में इस समस्या से निपटने के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि खर्च होने की बात सामने आई है जिसमे अंदाजा लगाया जा सकता है की 12 साल में 25 लाख से अधिक खर्च फिर भी स्थाई समाधान नही ।
चूहों की आवाजाही रोकने के लिए जालियां लगाने के साथ जेल तकनीक और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया गया। रसोईघर के आसपास के स्थानों में चूहामार दवाओं का भी उपयोग किया गया, लेकिन इन उपायों से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया जानकारों की माने तो इनका कहना है की चूहों का दिमाग इन सबसे आगे है इसलिए इन सब से बच पा रहे है।
हजारों चूहे मारने का दावा, लेकिन असर ज्यादा दिन नहीं रहा :–
साल 2011 में पेस्ट कंट्रोल एजेंसी की ओर से अस्पताल परिसर में करीब 10 से 15 हजार चूहे मारे जाने का दावा किया गया था। हालांकि, इस संख्या की पुष्टि के लिए किसी वैज्ञानिक गणना पद्धति का इस्तेमाल नहीं किया गया था। बताया गया कि अभियान का असर करीब एक महीने तक ही दिखाई दिया जो अस्पताल के चूहों को कुछ समय तक इन सबसे दूर रखने में मदद किया ।
इसके बाद चूहों की गतिविधियां फिर बढ़ गईं और मुख्य रसोईघर, दवा स्टोर सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में उनके पहुंचने की शिकायतें सामने आती रहीं। ऐसे स्थानों पर चूहों की मौजूदगी मरीजों की सुरक्षा और अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनती है जिसे साफ करना बेहद आवश्यक है।
अब चूहों के साथ कॉकरोच और दीमक पर भी फोकस :–
प्रस्तावित नए पेस्ट कंट्रोल टेंडर में सिर्फ चूहों को नियंत्रित करने की व्यवस्था नहीं होगी। इसमें कॉकरोच और दीमक से निपटने का काम भी शामिल किए जाने की तैयारी है जिसमे चूहों के साथ साथ दीमक और कॉकरोच भी साफ हो जायेंगे ।
अस्पताल के रेडियो डायग्नोसिस विभाग के विभागाध्यक्ष के कक्ष की दीवारों में दीमक का प्रकोप बढ़ने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में नए टेंडर के जरिए अस्पताल परिसर में अलग-अलग तरह के कीटों से एक साथ निपटने की योजना बनाई जा रही है जहां इन सभी का सफाया करने का अभियान पूरा किया जाएगा ।
शव को चूहों द्वारा कुतरने का मामला भी आया था सामने:–
छत्तीसगढ़ की राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आंबेडकर अस्पताल में चूहों की समस्या पहले भी गंभीर विवाद का कारण बन चुकी है। करीब छह वर्ष पहले मर्चुरी में रखे एक शव को चूहों द्वारा कुतरने का मामला सामने आया था। घटना के बाद परिजनों ने कड़ा विरोध जताया था और मामला मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचा था। इसके बाद फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष का तबादला सिम्स बिलासपुर किया गया था जिसके बाद कुछ समय तक चूहों से छुटकारा पाया गया था।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एनआईसीयू या अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को चूहों द्वारा काटे जाने की घटना दर्ज नहीं हुई है। फिर भी अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में चूहों की लगातार मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जो बहुत से आधुनिक मशीनों सहित अन्य जरूरी दवाइयों को खराब कर सकते है।
नए टेंडर से समाधान की उम्मीद :–
अब अस्पताल प्रशासन नए पेस्ट कंट्रोल टेंडर के जरिए समस्या पर प्रभावी नियंत्रण की तैयारी कर रहा है। इसमें चूहों के अलावा कॉकरोच और दीमक को भी शामिल किया जाएगा। अस्पताल में मौजूद महंगे उपकरणों, दवाइयों, खाद्य सामग्री और संवेदनशील चिकित्सा क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था को प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है । अब देखना यह है की इस नई टेंडर समाधान प्रक्रिया में चूहों और काकरोच दिमकों से कितना छुटकारा मिल पाता है।

0 टिप्पणियाँ