रायपुर का कछुआ वाला शिव मंदिर: पंचमुखी महादेव के दरबार से जुड़ी है संतान सुख की मान्यता

 छत्तीसगढ़ के शिवालय: दो तालाबों के बीच विराजे पंचमुखी महादेव, संतान प्राप्ति की मान्यता से दूर-दूर तक प्रसिद्ध

रायपुर सरोना के प्राचीन पंचमुखी महादेव मंदिर का दृश्य
रायपुर के सरोना गांव में दो तालाबों के बीच स्थित प्राचीन पंचमुखी महादेव मंदिर।
छत्तीसगढ़,रायपुर ।

 सावन का चौथा और अंतिम सोमवार होने के कारण रायपुर के सरोना गांव स्थित प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। करीब 250 साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए भक्त कतार में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजते रहे और मंत्रोच्चारण के बीच पंचमुखी महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया कहा जाता है की यह प्राचीन शिव मंदिर लगभग 250 या उससे अधिक पुराना है यह प्राचीन शिव मंदिर प्राचीन होने के साथ साथ भी बहुत सुंदर मनमोहक दिखाई देता है।

 

अद्भुत मूर्तिकला और आस्था का प्रतीक ये सरोना का प्राचीन शिव मंदिर देखे वीडियो :–

दो तालाबों के बीच बना है अनोखा शिव मंदिर जिसमे कई मछलियां और प्राचीन कछुए भी रहते है :–

रायपुर के सरोना का यह शिव मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी खास माना जाता है। मंदिर के दोनों ओर तालाब हैं, जिससे इसका पूरा परिसर बेहद मनमोहक नजर आता है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के नीचे से भी तालाब का पानी गुजरता है। जहां अनेक मछलियों सहित प्राचीन कछुए भी रहते है शायद यही वजह है कि इसे कई लोग ‘कछुआ वाले शिव मंदिर’ के नाम से भी जानते हैं जहां कई बड़े आकार के मछलियां और कछुए रहते हैं।

स्थानीय लोग मानते है भगवान का स्वरूप खिलाते है आटे का प्रसाद:–

रायपुर के इस सरोना के प्राचीन तालाब में लंबे समय से कछुए और मछलियां मौजूद हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार इन्हें भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। श्रद्धालु तालाब के किनारे रुककर कछुओं को देखते हैं और उन्हें आटे का प्रसाद खिलाते हैं जिन्हे देखकर मन भर जाता है ।

संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर पहुंचते हैं भक्त :–

इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता संतान प्राप्ति की है। मंदिर के पुजारी शंकर गोस्वामी के अनुसार, मंदिर का निर्माण राजपूत परिवार से जुड़े स्वर्गीय गुलाब सिंह ठाकुर की मान्यता से जुड़ा है। बताया जाता है कि वे नि:संतान थे और संतान की कामना से नागा साधुओं से मिले थे जिसके बाद ,

साधुओं ने उन्हें गांव के समीप तालाब खुदवाकर वहां भगवान शिव का मंदिर स्थापित करने की सलाह दी। मान्यता के अनुसार इसके बाद ठाकुर परिवार को संतान की प्राप्ति हुई। इसी कथा के चलते आज भी कई श्रद्धालु संतान सुख की इच्छा लेकर यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा करने पहुंचते हैं जहां भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर संतान की मनोकामनाएं मांगते है ।

 गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग है मुख्य आकर्षण :–

मंदिर का गर्भगृह भी अपनी अनूठी प्रतिमाओं के कारण विशेष आकर्षण रखता है। यहां पंचमुखी शिवलिंग के साथ भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित हैं। भगवान शिव की गोद में विराजमान गणेश की प्रतिमा भक्तों का ध्यान खींचती है जहां साथ ही प्राचीन होने के साथ साथ यह मंदिर शिवभक्तो को अपने तरफ आकर्षित करती है ।

इसके अलावा हंस पर विराजित ब्रह्मा, गरुड़ के साथ भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी मंदिर की धार्मिक महत्ता बढ़ाती हैं। मंदिर के द्वार पर कीर्तिमुख की प्रतिमा और पंचमुखी स्वरूप में भगवान शिव की उपस्थिति इसे दूसरे शिवालयों से अलग पहचान देती है जिसे लोग प्राचीन शिव मंदिर के नाम से जानते है और भगवान शिव को पूजते है।

 
बड़े बड़े कछुए उम्र लगभग 200 वर्ष से अधिक! देखे वीडियो 

 लगभग 250 से अधिक पुराना है ये प्राचीन शिव मंदिर :–

स्थानीय जानकारी के मुताबिक वर्तमान मंदिर का निर्माण 250 वर्ष पूर्व कराया गया था। यानी यह मंदिर करीब 250 साल पुराना है, जबकि स्थानीय परंपरा में इसकी प्राचीनता इससे भी अधिक बताई जाती है। मंदिर की देखरेख आज भी ठाकुर परिवार द्वारा की जाती है जो मंदिर को सुरक्षित रूप से रखते एवं इसका देखभाल करते है।

सावन और महाशिवरात्रि पर्व पर होती है यहां विशेष पूजा अर्चना :–

रायपुर सरोना के इस प्राचीन शिव मंदिर में सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां शिवभक्त विशेष पूजा-अर्चना करते है । सावन सोमवार को दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भगवान पंचमुखी महादेव के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं तथा सावन मास के पर्व पर कावड़िए यहां जल भी चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करते है।

निष्कर्ष :–

रायपुर का सरोना पंचमुखी शिव मंदिर आस्था, इतिहास और प्रकृति का अनोखा संगम है। दो तालाबों के बीच स्थित यह प्राचीन शिवालय अपनी पंचमुखी शिव प्रतिमा, कछुओं से जुड़ी मान्यता और संतान प्राप्ति की आस्था के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्राचीन मंदिर 250 से भी अधिक पुराना बताया जाता है ।

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