छत्तीसगढ़ में नकली होलोग्राम का खेल: दूसरे राज्यों की शराब को बनाया जा रहा था लोकल!
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| छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों की शराब पर नकली लेबल और होलोग्राम लगाकर बिक्री करने वाले नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया। |
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में अवैध शराब के कारोबार का ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसमें दूसरे राज्यों से लाई गई शराब को छत्तीसगढ़ की शराब जैसा दिखाने के लिए नकली होलोग्राम, लेबल और ढक्कन का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस की अलग-अलग जिलों में हुई कार्रवाई से इस नेटवर्क के कई कड़ियों का खुलासा हुआ है जिसमे दूसरे राज्यों से लाया गया शराब को छत्तीसगढ़ के शराब जैसा होलोग्राम लगाने का मामला सामने आया है।
दूसरे राज्यों की शराब पर छत्तीसगढ़ का नकली लेबल :–
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस जांच में सामने आया है कि मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों से शराब छत्तीसगढ़ लाई जा रही थी। इसके बाद उसकी पहचान छिपाने के लिए छत्तीसगढ़ के नाम वाले नकली लेबल और होलोग्राम लगाए जाते थे जिसे छत्तीसगढ़ में पहचान करना मुश्किल हो जाता था।
इस तरीके से तैयार बोतलों को सामान्य ग्राहक के लिए पहचानना मुश्किल हो सकता था। अवैध शराब के इस कारोबार में मुनाफा बढ़ाने के लिए पैकिंग से लेकर लेबलिंग तक की व्यवस्था अलग-अलग स्तर पर की जा रही थी जिसमे यह मामला खुलासे में आने के बाद आगे की गहरी जांच पड़ताल चालू की गई।
दिल्ली, पुणे और नागपुर से आता था पैकिंग का सामान बेचा जाता था छत्तीसगढ़ में :–
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार इस नेटवर्क के लिए होलोग्राम, स्टिकर और अन्य पैकिंग सामग्री अलग-अलग शहरों से मंगाई जाती थी। इनमें दिल्ली, पुणे और नागपुर का नाम सामने आया है जिन्हे पैकेजिंग करके छत्तीसगढ़ में अधिक मुनाफे में बेचा जाता था ।
यानी यह कारोबार केवल शराब की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि बोतलों को नए रूप में बाजार में पहुंचाने के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की गई थी। अलग-अलग स्थानों से सामान जुटाकर उसे गुप्त ठिकानों पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है जिसमे शराब सहित अन्य दूसरे समानों में छत्तीसगढ़ का होलोग्राम लगाकर दिया जाता था ।
डोंगरगढ़ से महासमुंद और कांकेर तक कार्रवाई :–
डोंगरगढ़ क्षेत्र में हुई कार्रवाई ने इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी उजागर की। सीमा से लगे इलाकों के रास्ते मध्य प्रदेश से शराब छत्तीसगढ़ पहुंचाई जा रही थी। पुलिस ने इस दौरान शराब के साथ पैकिंग से जुड़ी सामग्री भी बरामद की इसी के साथ ही इस शराब संबंधी मामले में महासमुंद का भी नाम आया था ।
जहां महासमुंद के सरायपाली में भी पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई। अगस्त में एक कार से 25 पेटियों में 1,192 पौवा शराब बरामद होने के बाद जांच आगे बढ़ी। सितंबर तक इस मामले में 3,229 लीटर से अधिक शराब मिलने और सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जिले में भी यही कार्यवाही की गई ।
जहां कांकेर के भानुप्रतापपुर में भी कार्रवाई के दौरान 4,409 खाली बोतलें और पौवे, 3,380 ढक्कन तथा 105 पत्ते होलोग्राम बरामद किए गए जिसके बाद पुलिस ने इसपर कड़ा एक्शन लिया ।
राजनांदगांव और सूरजपुर में भी सामने आई गड़बड़ी :–
सितंबर के अंतिम दिनों में राजनांदगांव में पुलिस ने करीब 9,600 बोतल शराब जब्त की। इस कार्रवाई के बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है इसके साथ ही सूरजपुर में एक अलग तरह का मामला सामने आया, जहां घर से मिलावटी शराब के साथ नकली ढक्कन और रैपर बरामद किए गए। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अवैध शराब के नेटवर्क में अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा था और छत्तीसगढ़ का होलोग्राम लगाया जा रहा था।
नकली होलोग्राम सिर्फ राजस्व का मामला नहीं :–
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा है। किसी बोतल पर असली जैसा लेबल या होलोग्राम लगा होने से यह जरूरी नहीं कि उसके अंदर मौजूद शराब भी अधिकृत स्रोत से आई हो मिलावटी या अनधिकृत शराब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए शराब की बिक्री और सप्लाई में निगरानी के साथ-साथ नकली पैकिंग और होलोग्राम तैयार करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण हो जाती है जिसमे एक प्रकार से देखा जाए तो शराब में मिलावट या होलोग्राम बदलने का मामला लोगो के स्वास्थ्य के साथ एक बेहद बुरा दुष्परिणाम है।
बड़े नाम हो सकते है इसमें शामिल :–
छत्तीसगढ़ में सामने आया यह मामला बताता है कि अवैध शराब की तस्करी अब केवल सीमा पार शराब पहुंचाने तक सीमित नहीं रह गई है। नकली लेबल, होलोग्राम, ढक्कन और रैपर के जरिए शराब की पहचान बदलने की कोशिश की जा रही थी। राजनांदगांव, महासमुंद, कांकेर और सूरजपुर में हुई कार्रवाइयों ने इस नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों को सामने लाया है। आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चैन के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है जिसमे बड़े बड़े नाम शामिल हो सकती है ।

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